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Gini Chaukhat (Acoustic)

Gini

Chaukhat (Acoustic)

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Текст песни «Chaukhat (Acoustic)»

Gini

चौखट पे खड़े हो क्यूँ?
समझाओ मुझे रू-ब-रू
ये कैसे हुआ? कहाँ से धुआँ
साँझ पे छाया बन गया?

आँखें उठाओ तुम
ज़मीं में ना हो गुम

ये कैसे हवा, ये भूखा बवंडर
रात को राख़ कर गया?
ये तुमने किया, तो मेरा जिया
भोर में बैरी बन गया

पर फ़िर कभी मिले हम यहीं
सवेरे के आँचल की छाँव सही
जब तक तुम्हें ये भेड़िए छोड़े ना
मैं यूँ धीर में वहीं
चौखट परिंदे गिनती रहूँगी

बरामदे की बंदिशें बीज से भर दिए
बुझ जाए ख़्वाहिशें
सोच ना पाए ये
बैरी जो बन गया सखा

भूत में बिगड़ गए
अब सहे मुश्किलें
हाथ थाम के ही ये भावी में बढ़ लिए
मुड़ के हँस दो ज़रा

बाद में हम अगर
जो जाएँगे बिख़र
साँसें, यही हवा
ये ज़मीं, ये जहाँ

ये तुमने किया तो मेरा जिया
कल कली बन गया
ये तुमने किया तो मेरा जिया
बीज से बड़ बन गया

पर फ़िर कभी मिले हम यहीं
सवेरे के आँचल की छाँव सही
जब तक तुम्हें ये भेड़िए छोड़े ना
मैं यूँ धीर में वहीं

चौखट परिंदे...
चौखट परिंदे...
चौखट परिंदे गिनती रहूँगी

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